ईरान और अमरीका का युद्ध क्यों हुआ आप जानते हो क्या मुद्दा था
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और संघर्ष कई सालों से चला आ रहा है, जिसे अक्सर “युद्ध जैसी स्थिति” कहा जाता है। हालांकि दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर पूर्ण युद्ध नहीं हुआ, लेकिन कई घटनाओं और विवादों ने उनके रिश्तों को बेहद खराब बना दिया है। इस तनाव के पीछे कई ऐतिहासिक, राजनीतिक और सैन्य कारण हैं।इस विवाद की शुरुआत 1979 की ईरानी क्रांति से मानी जाती है। इस क्रांति के बाद ईरान में इस्लामिक सरकार बनी और उसने अमेरिका के प्रभाव को खत्म कर दिया। उसी समय तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया गया और अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया गया। इस घटना के बाद से दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब हो गए।इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों पर टकराव होता रहा। सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा है। अमेरिका को डर था कि ईरान परमाणु हथियार बना सकता है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ ऊर्जा उत्पादन के लिए है। इस कारण अमेरिका ने ईरान पर कई आर्थिक प्रतिबंध (sanctions) लगाए, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा।एक और बड़ा कारण मध्य पूर्व में दोनों देशों के अलग-अलग हित हैं। ईरान कई ऐसे समूहों को समर्थन देता है, जिन्हें अमेरिका और उसके सहयोगी देश खतरा मानते हैं। वहीं अमेरिका इस क्षेत्र में अपने सहयोगियों, जैसे सऊदी अरब और इजराइल, का समर्थन करता है। इस कारण दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना रहता है।2020 में तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका ने ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी को एक ड्रोन हमले में मार दिया। इसके जवाब में ईरान ने इराक में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इस घटना ने दोनों देशों को सीधे टकराव के करीब ला दिया, हालांकि बाद में स्थिति कुछ हद तक शांत हो गई।इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमले, साइबर हमले और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी इस तनाव का हिस्सा रहे हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाते हैं।हालांकि समय-समय पर बातचीत और समझौते की कोशिशें भी हुई हैं, जैसे 2015 का परमाणु समझौता, लेकिन यह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया। इससे दोनों देशों के बीच अविश्वास और बढ़ गया।
